October 23, 2018
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महागठबंधन: बिना सेनापति के लड़ा जाएगा 2019 का युद्ध!

नई दिल्ली: आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर विपक्षी दलों के मिलकर महागठबंधन की तो प्लानिंग कर ली है, लेकिन अभी तक इस महागठबंधन का कोई भी नेता सामने नहीं आया है. लेकिन अब खबर यह आ रही है. महागठबंधन ने पीएम उम्मीदवार को लेकर यह फैसला लिया है.

बतादें कि जहाँ बीजेपी के पास नरेंद्र मोदी नाम की संजीवनी बूटी है तो वही इस बार लोकसभा के रण में कांग्रेस पार्टी की अगुवाई में बनाए जा रहे महागठबंधन का कोई सेनापति नहीं होगा. यह जानकारी कांग्रेस पार्टी के हवाले से लग रही है कि महागठबंधन लोकसभा चुनाव बिना सेनापति के ही लड़ने वाला है. दरअसल कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव जीतने और सरकार बनाने के लिए दो चरणों में फॉर्मूला तैयार किया है. जिसमें पहला चरण यह है कि कांग्रेस सभी दलों के साथ गठबंधन करके मैदान में उतरे और बीजेपी-नरेंद्र मोदी को हराने की रणनीति बनाए. फिर दूसरे चरण में चुनाव के बाद महागठबंधन का नेता तय किया जाए जोकि सीटों के आधार पर तय होगा. मीडया के अनुसार राहुल गांधी ने यह भी कहा कि मोदी अगली बार पीएम तभी बनेंगे, जब 230 से 240 सीटों पर जीत दर्ज करेंगे, लेकिन मुझे भरोसा है कि अगर गठबंधन सटीक बैठता है, तो यूपी, बिहार और महाराष्ट्र में हमें ज्यादा सीटें मिलेंगी.

कांग्रेस पार्टी को बीजेपी के विरोधी दलों से भी कुछ उम्मीद नजर आ रही है. हालाँकि शिवसेना को साथ लाने की कोशिश नहीं की जायेगी. लेकिन टीडीपी को साथ लाने में कोई भी परहेज नहीं होगा. साथ  माना जा रहा है कि 2019 के चुनाव आते आते बीजेपी के ही कई साथी दल पीएम नरेंद्र मोदी एक खिलाफ उग्र हो जाएंगे. जैसे की अभी से ही लोजपा और रालोसपा ने विरोध और अपनी मांगे बढ़ानी शुरू कर दी है. इन हालातों में कांग्रेस पार्टी इन दलों को भी महागठबंधन में आने का न्योता दे सकती है. इतना ही कांग्रेस सूत्रों ने बताया की पार्टी बीजेपी के ही विरोधी नेताओं को मंच पर लाने की कोशिश में जुटी है.

हाल ही में ममता बनर्जी ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवानी से मुलाकात और 15 मिनट की वार्ता ने बहुत से सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीँ बीजेपी ‘शत्रु’घन सिन्हा, यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी जैसे कई नेताओं का भी महागठबंधन साथ चाहता है. वहीँ बिना सेनापति के युद्ध मैदान में उतरने को लेकर कहा गया है कि महागठबंधन को मिलने वाली सीटों के आंकड़े के बाद ही पीएम उम्मीदवार तय होगा. क्योंकि पीएम पद एक है और उम्मीदवार दर्जनों. इस हालातों में महागठबंधन में एकराय बनाने के लिए कांग्रेस का यह फैसला कारगार साबित हो सकता है.

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