October 23, 2018
Uttar Pradesh

गाजियाबाद: विकास कार्यों में लीपापोती से जनता परेशान, भूख हड़ताल की चेतावनी

गाजियाबाद (योगेश कुमार): विकास के नाम पर जनता से वोट हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी की कथित विकास की नीतियों के चलते जनता परेशान हो रही है. इस बात का अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि जरा से काम के लिए भी लोगों को धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल जैसे कदम उठाने पड़ रहे हैं.

दरअसल केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के विकास से तो सभी भलीभांति परिचित ही होंगे कि कई सालों में 134 किलोमीटर लम्बे एक्सप्रेस वे में 9 किलोमीटर एक्सप्रेस का निर्माण कर साहेब ने उद्घाटन कर दिया. ठीक ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का विकास है. जहाँ विकास के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति और बयानबाजी होती है. आपको सीएम योगी आदित्यनाथ का वह बयान तो याद ही होगा कि सीएम बनने के बाद कहा था कि, ‘15 जून तक राज्य की सड़कें गढ्ढा मुक्त हो जायेंगी’. लेकिन योगी सरकार से कहीं ढीला उनका प्रशासन है. राज्य की बता छोडिये एनसीआर जैसे इलाकों की सडकों को देखकर गाँव देहात की सड़कें याद आ जाती है.

राज्य में विकास एक नाम पर जनता के साथ धोखा और मजाक जारी है. क्षेत्रीय जनता विकास कार्यों के लिए सरकार, जिला प्रशासन, क्षेत्र के माननीयों के सामने गिडगिडाने को मजबूर है. वहीँ सरकार कभी जिन्ना तो कभी कैराना में बिजी है. हम बात कर रहे हैं गाजियाबाद के लोनी विधानसभा क्षेत्र की. लोनी के वार्ड 28 DLF अंकुर विहार का एमएम रोड की मरम्मत को लेकर कई लोग सरकारी बाबुओं और क्षेत्रीय नेता जी के चक्कर काट रहे हैं. पर कोई सुनने को तैयार ही नहीं है. यह योगी का विकास भी मोदी सरकार की राह पर चल रहा है. उन्होंने दो साल में 9 किमी सडक बनायी तो योगी सरकार और इनका प्रशासन जरा से गड्ढा भरने के लिए साल भर तो लगायेंगे ही न.

यहाँ एक शिकायतकर्ता आरपी पाण्डेय ने बताया कि वह लम्बे समय से क्षेत्र में मूलभूत विकास कार्यों के लिए संघर्ष कर रहे हैं लेकिन सरकार ने जनता की सुननी ही छोड़ दी है. पाण्डेय ने पिछले समय प्रदर्शन और नगर पालिका के सामने भूख हड़ताल तक की धमकी दी थी, लेकिन नगर पालिका से लेकर क्षेत्रीय विधायक के कान पर जून भी नही रेंगी.

असल में जिस एमएम रोड के निर्माण कार्य के लिए गुहार लगाई जा रही है वह यहाँ कालोनी वासियों की लाइफ लाइन है. जोकि एक साल से भी ज्यादा से खराब पड़ी है. आने वाले समय में बारिश के दौरान यहाँ तालाब भरना लाजमी सा है. पिछले समय सामाजिक कार्यकर्त्ता आरपी पाण्डेय ने धरना प्रदर्शन की धमकी दी तो 4 मई से नगर पालिका ने मलवा डलवाना चालू करा दिया.

अभी केवल मलवा डालकर रोड को छोड़ दिया गया. वहीँ नगर पालिका द्वारा मलवा डाले जाने को लेकर भी विवाद शुरू हो गया है. पिछल साल से रोड को लेकर चले आ रहे लापरवाही पर जब हमने क्षेत्रीय नगर पालिका और जिम्मेदारों से संपर्क की कोशिश की तो बात नामुमकिन थी.

कुल मिलाकर अभी हालात जस के तस हैं. एनसीआर जैसे क्षेत्रों में सरकार के विकास के दावों की हकीकत ऐसी है तो दूर दराज के गाँव आदि के विकास की परिकल्पना भी नहीं की जा सकती है. फिलहाल चुनाव में अभी देर है और वोट लेने के बाद हर नेता का यही हाल होता है.

Report: Yogesh Kumar

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