November 15, 2018
Videsh

चीन की चाल: तो भारत से बहुत दूर हो जाएगा नेपाल!

काठमांडू: पिछले कुछ समय से भारत और नेपाल के बीच रिश्तों में काफी उतार चढ़ाव देखा गया है. इसी बीच चीन ने नेपाल पर अपनी बुरी नजर डालते हुए भारत से दूर करने के लिए सबसे बड़ी चाल चल दी है.

बतादें कि चीन हमेशा ने भारत के पक्षधर और साथी देशों को अपने कब्जे में लेने की कोशिश में लगा रहता है. इसी कड़ी में अब नेपाल को भी भारत से अलग करने के लिए उसने बड़ा दांव खेला है. मीडिया में जारी खबरों की माने तो चीन ने शुक्रवार को नेपाल को अपने चार बंदरगाहों और तीन लैंड पोर्टों का इस्तेमाल करने की इजाजत देते हुए नेपाल और भारत के बीच बनी दूरियों को और भी लंबा कर दिया है. चीन का यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य के लिए जमीन से घिरे नेपाल की भारत पर निर्भरता कम हो जाएगी और उसपर चीन का दवाब भी बढ़ जाएगा. इस हालातों में नेपाल चीन को ज्यादा वरीयता देगा.

कैलाश मानसरोवर यात्रा: शिवभक्तराहुल का नहीं देखा होगा यह नया अवतार

जिससे भारत को कई मोर्चों पर काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है. दरअसल चीन पिछले कुछ समय से भारत के लगभग सभी सहयोगी देशों को अपने पक्ष में लेने की लिए हर कोशिश करने में लगा है. इसके लिए वह भारी भरकम कर्ज बांटने के साथ ही चीन अब अपने संसाधनों का इस्तेमाल करने की अनुमति देने लगा है.

केसीआर की इस हरकत पर नाराज हुआ चुनाव आयोग, 11 को करेगा दौरा

चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार चीन ने नेपाल को शेनजेन, लियानयुगांग, झाजियांग और तियानजिन सीपोर्ट का इस्तेमाल करने की इजाजत दी है. तियानजिन बंदरगाह नेपाल की सीमा से सबसे नजदीक बंदरगाह है, जो करीब 3,000 किमी दूर है. वहीँ चीन ने लंझाऊ, ल्हासा और शीगाट्स लैंड पोर्टों (ड्राई पोर्ट्स) भी नेपाल यूज कर सकेगा. जिससे भारत पर निर्भर देश लालच में आकर चीन के साथ आ जाएँ.

वहीँ चीन की यह चाल कहीं न कहीं भारत पर भारी पड़ सकती है. क्योंकि भारत अपने पडोसी देशों में उतना इन्वेस्टमेंट नहीं कर पा रहा है जिससे वह उन्हें भरोसे में ले सके. ऐसे में श्रीलंका, नेपाल, भूटान सहित कई दक्षिण एशियाई देश चीन को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं. जोकि भारत के लिए खतरे की घंटी है.

loading...

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *