November 13, 2018
Shiksha

जानिए यहाँ: सीबीआई डायरेक्टर की ‘छुट्टी’ क्या कहता है कानून?

नई दिल्ली: बुधवार जब देश ने आँखें खिली तो उन्हें खबर लगी की देर रात ही सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया गया है. माना जा रहा है कि यह फैसला रात को ही हुआ है! और सुबह खबर बाहर आ गयी. ऐसे में सोशल मीडिया पर सीबीआई डायरेक्टर को छुट्टी पर भेजे जाने को एलकार कई तहर के सवाल उठ रहे हैं कि सीबीआई डायरेक्टर्स को किस प्रक्रिया के तहत छूती पर भेजा जा सकता है?

“सवाल क्या सरकार को सीबीआई निदेशक को छुट्टीपर भेजने का अधिकार है?

जवाब– विनीत नारायण Vs यूनियन ऑफ इंडिया मामले में जस्टिस एस.पी. भरुचा और जस्टिस एस.सी. सेन की ओर से 1997 और लोकपाल बिल 2014 में दिए गए गाइडलाइन के मुताबिक extraordinary situation में निदेशक को हटाया ( या कहें कि छुट्टी पर भेजा ) जा सकता है, लेकिन इसके लिए सेलेक्शन कमेटी ( 2014 लोकपाल बिल के तहत-पीएम, नेता प्रतिपक्ष, सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस) की अनुमति चाहिए, सीवीसी का सुझाव इस मामले में अप्रासंगिक है.

सवाल क्या सीवीसी सीबीआई निदेशक के आचरण की जांच कर सकते हैं जैसा कि सरकार ने आदेश दिया है?

जवाब– सीवीसी को ऐसा कोई अधिकार प्राप्त नहीं है. ये अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति के आदेश से निदेशक के आचरण की जांच के लिए खास तौर पर बनाए गए accountability commission को ही प्राप्त है, जो अब तक आलोक वर्मा के मामले में बनाया नहीं गया है.

सीबीआई निदेशक को दो साल की तय अवधि से पहले सिर्फ misbehavior/कदाचार के आरोप में राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जा सकता है. लेकिन इसके लिए पहले सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के तीन रिटायर्ड जज की अकाउन्टेबिलिटी कमीशन द्वारा मामले की जांच में कदाचार का साबित होना जरूरी है.

सवाल अंतरिम निदेशक के पद पर नागेश्वर राव की पदस्थापना क्या कानूनी है?

जवाब – राव को कैबिनेट की एप्वाइंटमेंट कमेटी की ओर से अंतरिम निदेशक के पद पर नियुक्त किया गया. कानून में अंतरिम निदेशक पद नहीं है, लिहाजा नागेश्वर राव के निदेशक पद पर नियुक्ति के लिए सेलेक्शन कमेटी (पीएम,नेता प्रतिपक्ष, चीफ जस्टिस सुप्रीम कोर्ट ) की प्रक्रिया पूरी करनी जरूरी है.”

ऐसे में सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेजे जाने का फैसला किसने और किस स्तर से लिया गया है. यह सवाल अभी भी बना हुआ है?

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