August 22, 2018
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सह लिए तो सही, नहीं तो नालायक …!!

जी  हां … यह हर उस संवेदनशील व्यक्ति की विडंबना है जो गलत होते देख नहीं पाता. लेकिन मुश्किल यह कि विरोध करना भी  हर किसी के बूते की बात नहीं. क्योंकि समाज का सीधा  नियम है कि सह लिया तो सही नहीं तो नालायक….  बाल विवाह और मृत्युभोज समेत तमाम ऐसी सामाजिक बुराइयां थी, […]
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…. क्यों खास है ज़िम्बाब्वे का चुनाव?

हरारे: अफ़्रीकी देश ज़िम्बाब्वे में सोमवार को चुनावी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. अब देखना ये है कि जनता किसे चुनेगी. ये चुनाव ज़िम्बाब्वे निवासियों के लिए बेहद अहम है क्योंकि ये पहली बार है जब रॉबर्ट मुगाबे के बिना चुनाव हुए हैं. 37 सालों से सत्ता पर काबिज रहे रॉबर्ट मुगाबे को बीते साल […]
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वाह कोलकाता आह कोलकाता .!!

देश की संस्कारधानी कोलकाता पर गर्व करने लायक चीजों में शामिल है फुटपाथ पर मिलने वाला इसका बेहद सस्ता खाना। बचपन से यह आश्चर्यजनक अनुभव हासिल करने का सिलसिला अब भी बदस्तूर जारी है । देश के दूसरे महानगरों के विपरीत यहां आप चाय – पानी लायक पैसों में खिचड़ी से लेकर बिरियानी तक खा […]
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आओ . आंदोलन – आंदोलन खेलें.!!

आपका सोचना लाजिमी है कि भला आंदोलन से खेल का क्या वास्ता. देश ही नहीं बल्कि दुनिया में जनांदोलनों ने बड़े बड़े तानाशाहों को धूल में मिला दिया. लेकिन जब आंदोलन  भी खेल भावना से किया जाने लगे तो ऐसी  कुढ़न स्वाभाविक ही कही जा सकती है. दरअसल मेरे गृहराज्य में कुछ दिन पहले एक […]
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खबरों के खजाने का सूखाग्रस्त क्षेत्र …!!

ब्रेकिंग न्यूज… बड़ी खबर…. चैनलों पर इस तरह की झिलमिलाहट होते ही पता नहीं क्यों मेरे जेहन में कुछ खास परिघटनाएं ही उमड़ने – घुमड़ने लगती है. मुझे लगता है यह ब्रेकिंग न्यूज देश की राजधानी दिल्ली के कुछ राजनेताओं के आपसी विवाद से जुड़ा हो सकता है या फिर किसी मशहूर राजनेता घराने के […]
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यह हैं बिहार के एक सेकेंड से भी कम समय में बनने वाले टॉयलेट्स!

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातों को लोग जाने क्यों अपने तरीके से सोचने लगते हैं. अरे भई वह प्रधानमंत्री हैं उनके जैसा सोचोगे तो जिन्दगी भर गुना-भाग ही करते रहोगे. अब कल  ही का भाषण देख लो कि पीएम साहब हर 1.04 सेकेण्ड में टॉयलेट बनवा रहे थे. इनती स्पीड में सुपरसोनिक विमान […]
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दलितों की ओर आंख भी उठाई तो सवर्ण समाज को हो जाएगी फांसी…

जब देश में दोहरे मापदंड, पक्षपाती कानून, नौकरी में लोगों के होने वाले भेदभाव के बाद भी अगर दलितों की दशा-दिशा में सुधार नहीं हो रहा है, इतना सब कुछ होने के बाद भी वह खुद को शोषित महसूस कर रहे हैं क्यों ने सारे सवर्ण समाज को फांसी पर चढ़ा दिया जाए, या फिर […]
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यादों में आलोक: सत्यातीत पत्रकारिता: भारतीय संदर्भ

जेआईडेस्क: भारतीय मीडिया पर, मैं अपना दुखड़ा सुनाना शुरू करूँ उससे पहले मैं एक बात कहना चाहता हूँ कि आज के दौर में विभन्न संस्थानों के पत्रकारों का एक होना और एक साथ एक मंच पर आ पाना असंभव सा लगता है, ऐसा इसलिए क्योंकि जिस दौर की पत्रकारिता और पत्रकार ‘दस जनपथ’ और ‘अशोका […]
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श्रीदेवी से फुर्सत मिल गयी हो डोकलाम की चिंता कर ली जाए?

नई दिल्ली: भारत चीन के बीच एकबार फिर से सीमा पर विवाद शुरू हो सकता है. लेकिन अभी इतनी चिंता वाली कोई बात नहीं है. आराम से श्रीदेवी की आत्मा को स्वर्ग तक पहुंचा आओ. फिर इस मुद्दे पर चिंता कर ली जायेगी. वैसे राज्य मंत्री ने भारत को थोड़ी सी टेंशन वाली खबर से […]