October 21, 2018
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Kavita/kahaanee

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कविता: जमाने की न जाने, ये कैसी बयार है…

बदनाम हस्तियों पर फिल्म बनाने की बॉलीवुड की बढ़ती प्रवृति पर खांटी खड़गपुरिया का प्रहार ======================================= जमाने की न जाने, ये कैसी बयार है… नेपथ्य में नायक, मगर खलनायकों की बहार है नाम से ज्यादा बदनामी की पूछ बजता डंका जोरदार है… नेक माने जा रहे बेवकूफ धूर्त
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व्यंग्य: क्या अदा है, चुभो कर नश्तर…

राष्ट्रव्यापी दो दिवसीय एटीएम व बैंक हड़ताल पर खांटी खड़गपुरिया का तंज ======================================= क्या अदा है , चुभो कर नश्तर शुक्रिया भी कहते हैं हड़ताल भी करते हैं  और सफल बनाने की अपील भी करते हैं लेकिन उन लाखों बदनसीबों का क्या जो जहालत भी झेलते हैं मगर उफ किए बगैर काम भी किया करते […]
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कविता- मेरी व्यथा: मां हाथों में कलम नहीं मैं तो खून से सनी थी…

मेरी व्यथा: मां हाथों में कलम नहीं मैं तो खून से सनी थी… ============================================ माँ हाथों में कलम नहीं मैं तो खून से सनी थी, घर पे नहीं मैं तो जंगल में मरी हुई पड़ी थी.   क्या खता थी माँ मेरी, मेरा मुस्लिम होना जुर्म था, या मेरा एक लड़की होना या 8 साल का […]
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ग़ज़ल:  नज़र के रास्ते, मैं दिल में उतर जाऊँगा…

ग़ज़ल:  नज़र के रास्ते, मैं दिल में उतर जाऊँगा… ================ नज़र के रास्ते, मैं दिल मे उतर जाऊँगा. इधर ना जाऊँगा तो, और किधर जाऊँगा..   इक तेरा  दर है जहाँ, आके मुझे सुकून मिला, अगर  ये  छूट  गया तो , मैं  किधर  जाऊंगा .   कभी ना छोड़ना, मेंरा साथ, अय मेरे परवर, तेरे  […]
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लघुकथा: नमक का घोल…

नमक का घोल ========== ढाबे पर बैठे-बैठे खामोशी बहुत लंबी हो चली थी. अब ऊब भरी उकताहट न पसर जाये लिहाजा जिज्ञासा ने बोलना ही उचित समझा. “तो.. अगले हफ्ते मैं दिल्ली जा रही हूं” प्रशांत वैसे ही जड़वत बैठा रहा. जैसे कुछ सुना ही नहीं. ” मैं कुछ कह रही हूं” “सुना …. मगर […]
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कविता: नमामि गंगे परियोजना की लेटलतीफी पर केंद्रीय मंत्री की अफसरों से नाराजगी पर…

नमामि गंगे परियोजना की लेटलतीफी पर केंद्रीय मंत्री की अफसरों से नाराजगी पर… खांटी खड़गपुरिया का पंच… —————————– वाकई… आप महान हैं श्रीमान कहलाते हैं अफसर, दिखाते हैं शान वाकई आप महान हैं श्रीमान … चोरों से यारी , शरीफों से अकड़ आपका तो काम ही है हर काम में बाधा दान वाकई आप महान […]
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कविता: सरकार की इस अदा पर मरने को जी करता है…

देश की मुआवजे की राजनीति पर… खांटी खड़गपुरिया की चंद लाइनें ——————————— सरकार की इस अदा पर मरने को जी करता है जीते जी नहीं थे काम के पर मरने पर लाखों का चेक कटता है जिंदा थे तब नहीं थी फुर्सत तबियत पूछने की ज्यों मरे तो लंबा जुलूस निकलता है जहालत भरी जिंदगी […]
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कविता: खाते हैं सड़े मांस शौक से…..

कोलकाता में सड़े मांस परोसे जाने को ले चल रहे विवाद पर चंद पंक्तियां जब चली खांटी खड़गपुरिया की कलम … ————————————— खाते हैं सड़े मांस शौक से ताजे फल खाने को तैयार नहीं शराब बिकती गली – गली मगर दूध पीने को कोई तैयार नहीं जख्म देने वाली चीजें मंजूर है मगर कड़वी दवा […]
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कासगंज बदनाम कर दिया……

कासगंज बदनाम कर दिया…… कासगंज बदनाम कर दिया चंद वहाबी कपूतों ने चंदन का देखो खून कर दिया चंद वहाबी कपूतों ने मौन हमारा मौन रहा, हम इक शब्द न बोल सके लहू हमारा छलनी कर दिया, चंद वहाबी कपूतों ने कासगंज बदनाम कर दिया…… देश में सब गर भाई  है, तो गद्दार वो बोलो […]