October 23, 2018
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कविता: जीवन का ये लक्ष्य अटल है…

हिंदी दिवस के अवसर पर राजपाल सिंह की कविता जीवन का ये लक्ष्य अटल है हमने तुमने चुनना है हिंदी के उज्जवल इतिहास को अपने हाथ से बुनना है है विश्वास अपना ये हिंदी को शिखर स्थान मिले जहाँ जहाँ हो पूत माता के हर जगह हिंदी को सम्मान मिले सम्मानों का मार्ग बड़ा है […]
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कविता: दास्तां सुन कर क्या करोगे दोस्तों …!!

आपबीती पर पेश है खांटी खड़गपुरिया तारकेश कुमार ओझा की चंद लाइनें ============================================ कविता: दास्तां सुन कर क्या करोगे दोस्तों …!! बचपन में कहीं पढ़ा था रोना नहीं तू कभी हार के सचमुच रोना भूल गया मैं बगैर खुशी की उम्मीद के दुख – दर्दों के सैलाब में बहता रहा – घिसटता रहा भींगी रही […]
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कविता: मेरे गांव की गलियां…

कविता: मेरे गांव की गलियां… ======================================== मेरे गांव की गलियां… सुना है बेड़ियों में जकड़ गई हैं गांव की हंसती खेलती गलियां अब तो सुना है दो धड़ों में बंट गई हैं गांव की गलियां अब वो बात नहीं जब नंग धड़ंग पायल बंधी गलियों में दौड़ती थीं एड़ियाँ अब वो बात नहीं जब गांव […]
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कविता: सावन की पुकार…!!

कांवड़ यात्रा पर विवाद से दुखी है खांटी खड़गपुरिया तारकेश कुमार ओझा. पेश है नई कविता ========================================= सावन की पुकार…!! बुलाते हैं धतुरे के वो फूल धागों की डोर बाबा धाम को जाने वाले रास्ते गंगा तट पर कांवरियों का कोलाहल बोल – बम का उद्गघोष मदद को बढ़ने वाले स्वयंसेवियों के हाथ कांवर की […]
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हास्य: भारत को चमका देंगे हम, सिर्फ चुनावी नारों में…

हास्य: भारत  को  चमका  देंगे  हम, सिर्फ  चुनावी  नारों  में… ============================================ भारत  को  चमका  देंगे  हम, सिर्फ  चुनावी  नारों  में भूखे  किस्से  तुम  भी  पढ़ना, बंद  करो अखबारों  में   राशन ,कपड़े ,घर की  खातिर  आशाएं  गिरवी  होंगी भाव  सुनो  तो  डर  लगता  है  आग लगी बाजारों में   खून- खराबा,  चीखें,  मातम  सहमा  सारा  […]
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बेटियां: कोख से अब जन्म लेतीं, बेटियां मत छीनिए…

बेटियां: कोख से अब जन्म लेतीं, बेटियां मत छीनिए… ============================================= कोख से अब जन्म लेतीं, बेटियां मत छीनिए। गुनगुनाने दो,चमन से, तितलियां मत छीनिये। घर बदलती हैं मगर यह दिल बदलती हैं नहीं, आप घर से प्रेम की ये खिड़कियां मत छीनिये। आप नारी शक्ति का सम्मान करना सीखिए, आसमां की ओर बांधी मुट्ठियां मत […]
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कविता: मेरे बाबा तो भोलेनाथ…

कविता: मेरे बाबा तो भोलेनाथ… देश में सनसनी फैला रहे बाबाओं के कारनानों पर पढ़िए खांटी खड़गपुरिया ========================================= मेरे बाबा तो भोलेनाथ… बाबा का संबोधन मेरे लिए अब भी है उतना ही पवित्र और आकर्षक जितना  था पहले अपने बेटे और भोलेनाथ को मैं अब भी बाबा पुकारता हूं अंतरात्मा की गहराईयों से क्योंकि दुनियावी […]
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कविता: मामूली हैं मगर बहुत खास है… वो छिप छिप कर फिल्मों के पोस्टर देखना….

बचपन की स्मृतियों पर पेश है खांटी खड़गपुरिया तारकेश कुमार ओझा की नई कविता … ======================================== मामूली हैं मगर बहुत खास है… बचपन से जुड़ी वे यादें वो छिप  छिप कर फिल्मों के पोस्टर देखना मगर मोहल्ले के किसी भी बड़े को देखते ही भाग निकलना सिनेमा के टिकट बेचने वालों का वह कोलाहल और […]
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हास्य-व्यंग्य: भगवान सरकारी बंगला किसी से न खाली करवाए… .!!

भगवान सरकारी बंगला किसी से न खाली करवाए… .!! ============================================== मैं जिस शहर में रहता हूं इसकी एक बड़ी खासियत यह है कि यहां बंगलों का ही अलग मोहल्ला है. शहर के लोग  इसे बंगला साइड कहते हैं. इस मोहल्ला या कॉलोनी को अंग्रेजों ने बसाया था. इसमें रहते भी तत्कालीन अंग्रेज अधिकारी ही थे. […]
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लघुकथा: खबरी अम्मा

खबरी अम्मा:- ============================================ पछिलहरे उठकर सारी नित्यक्रिया निपटाकर अंततः अम्मा छः बजे तक एकदम फ्री हो जाती फिर शुरू होती उनकी घरवादारी…. इस घर से उस घर जब तक दो चार घर छुछुवा न लें उनकी दिनचर्या शुरू न हो पाती. सामने तो सब उन्हें अम्मा कहते हैं लेकिन पीठ पीछे डाकगाड़ी…. अस्सी साल की उम्र […]