October 21, 2018
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Sampaadakeey

Sameeksha

हास्य-व्यंग्य: दूसरों की कमाई , हमें क्यों बताते हो भाई ….!!

दूसरों की कमाई , हमें क्यों बताते हो भाई ….!! ========================================= उस विवादास्पद अभिनेता पर बनी फिल्म की चर्चा चैनलों पर शुरू होते ही मुझे अंदाजा हो गया कि अगले दो एक – महीने हमें किसी न किसी बहाने से इस फिल्म और इससे जुड़े लोगों की घुट्टी लगातार पिलाई जाती
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कविता: मेरे बाबा तो भोलेनाथ…

कविता: मेरे बाबा तो भोलेनाथ… देश में सनसनी फैला रहे बाबाओं के कारनानों पर पढ़िए खांटी खड़गपुरिया ========================================= मेरे बाबा तो भोलेनाथ… बाबा का संबोधन मेरे लिए अब भी है उतना ही पवित्र और आकर्षक जितना  था पहले अपने बेटे और भोलेनाथ को मैं अब भी बाबा पुकारता हूं अंतरात्मा की गहराईयों से क्योंकि दुनियावी […]
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कविता: मामूली हैं मगर बहुत खास है… वो छिप छिप कर फिल्मों के पोस्टर देखना….

बचपन की स्मृतियों पर पेश है खांटी खड़गपुरिया तारकेश कुमार ओझा की नई कविता … ======================================== मामूली हैं मगर बहुत खास है… बचपन से जुड़ी वे यादें वो छिप  छिप कर फिल्मों के पोस्टर देखना मगर मोहल्ले के किसी भी बड़े को देखते ही भाग निकलना सिनेमा के टिकट बेचने वालों का वह कोलाहल और […]
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हास्य-व्यंग्य: भगवान सरकारी बंगला किसी से न खाली करवाए… .!!

भगवान सरकारी बंगला किसी से न खाली करवाए… .!! ============================================== मैं जिस शहर में रहता हूं इसकी एक बड़ी खासियत यह है कि यहां बंगलों का ही अलग मोहल्ला है. शहर के लोग  इसे बंगला साइड कहते हैं. इस मोहल्ला या कॉलोनी को अंग्रेजों ने बसाया था. इसमें रहते भी तत्कालीन अंग्रेज अधिकारी ही थे. […]
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लघुकथा: खबरी अम्मा

खबरी अम्मा:- ============================================ पछिलहरे उठकर सारी नित्यक्रिया निपटाकर अंततः अम्मा छः बजे तक एकदम फ्री हो जाती फिर शुरू होती उनकी घरवादारी…. इस घर से उस घर जब तक दो चार घर छुछुवा न लें उनकी दिनचर्या शुरू न हो पाती. सामने तो सब उन्हें अम्मा कहते हैं लेकिन पीठ पीछे डाकगाड़ी…. अस्सी साल की उम्र […]
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कविता: जमाने की न जाने, ये कैसी बयार है…

बदनाम हस्तियों पर फिल्म बनाने की बॉलीवुड की बढ़ती प्रवृति पर खांटी खड़गपुरिया का प्रहार ======================================= जमाने की न जाने, ये कैसी बयार है… नेपथ्य में नायक, मगर खलनायकों की बहार है नाम से ज्यादा बदनामी की पूछ बजता डंका जोरदार है… नेक माने जा रहे बेवकूफ धूर्त – बेईमानों की जय – जयकार है अग्निपथ […]
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व्यंग्य: क्या अदा है, चुभो कर नश्तर…

राष्ट्रव्यापी दो दिवसीय एटीएम व बैंक हड़ताल पर खांटी खड़गपुरिया का तंज ======================================= क्या अदा है , चुभो कर नश्तर शुक्रिया भी कहते हैं हड़ताल भी करते हैं  और सफल बनाने की अपील भी करते हैं लेकिन उन लाखों बदनसीबों का क्या जो जहालत भी झेलते हैं मगर उफ किए बगैर काम भी किया करते […]
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कविता- मेरी व्यथा: मां हाथों में कलम नहीं मैं तो खून से सनी थी…

मेरी व्यथा: मां हाथों में कलम नहीं मैं तो खून से सनी थी… ============================================ माँ हाथों में कलम नहीं मैं तो खून से सनी थी, घर पे नहीं मैं तो जंगल में मरी हुई पड़ी थी.   क्या खता थी माँ मेरी, मेरा मुस्लिम होना जुर्म था, या मेरा एक लड़की होना या 8 साल का […]
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ग़ज़ल:  नज़र के रास्ते, मैं दिल में उतर जाऊँगा…

ग़ज़ल:  नज़र के रास्ते, मैं दिल में उतर जाऊँगा… ================ नज़र के रास्ते, मैं दिल मे उतर जाऊँगा. इधर ना जाऊँगा तो, और किधर जाऊँगा..   इक तेरा  दर है जहाँ, आके मुझे सुकून मिला, अगर  ये  छूट  गया तो , मैं  किधर  जाऊंगा .   कभी ना छोड़ना, मेंरा साथ, अय मेरे परवर, तेरे  […]
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लघुकथा: नमक का घोल…

नमक का घोल ========== ढाबे पर बैठे-बैठे खामोशी बहुत लंबी हो चली थी. अब ऊब भरी उकताहट न पसर जाये लिहाजा जिज्ञासा ने बोलना ही उचित समझा. “तो.. अगले हफ्ते मैं दिल्ली जा रही हूं” प्रशांत वैसे ही जड़वत बैठा रहा. जैसे कुछ सुना ही नहीं. ” मैं कुछ कह रही हूं” “सुना …. मगर […]