October 23, 2018
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‘अरे शरीफ लोग’ का हुआ मंचन, लोटपोट हुए दर्शक

नई दिल्ली: पंचानन पाठक स्मृति हास्य नाट्य समारोह 2018 के 7वें दिन ड्रामाटर्जी आर्ट्स एंड कल्चर सोसाइटी की ओर से युवा निर्देशक सुनील चौहान के निर्देशन में ‘अरे शरीफ़ लोग’ का मंचन किया गया. इस मौके पर मुख्य अतिथी के साथ-साथ खुद इस समारोह के आयोजक दीनेश अहलावत और ड्रामाटर्जी के प्रेसिडेंट आरिफ अब्बासी भी मौजूद रहे.

बतादें कि दिल्ली के श्रीराम सेंटर ऑडिटोरियम में जयवंत दलवी की कहानी पर आधारित नाटक ‘अरे शरीफ लोग’ का मंचन किया गया. इस मौके पर ऑडिटोरियम खचाखच भरा हुआ था.

नाटक के मंचन और पात्रों का अभिनय द्केह्कर हर कोई ताली बजाने को मजबूर हो गया. जैसे-जैसे नाटक रोचक होता चला गया वैसे ही लोगों की आवाज और तालियों की गूंज बढ़बढ़ती चली गयी. इस नाटक ने लोगों को अखिरी तक बांधे रखा. दर्शकों की माने तो नाटक शुरू से अंत तक रोचक रहा.

‘अरे शरीफ लोग’

दरअसल ‘अरे शरीफ लोग’ नाटक जयवंत दलवी की कहानी पर आधारित नाटक में अभिनय के जरिये कलाकारों जान डाल दी. इस नाटक में एक बिल्डिंग में रहने वाले लोगों की शराफ़त का ज़िक्र किया गया था, जो की एक नई किराएदार पर डोरे डालते हैं.

खुद को शरीफ बताने वाले ये लोग पूरी कोशिश करते हैं कि कैसे भी चंदा (नई किराएदार) उनके चंगुल में फंस जाए. वहीं उनकी धर्म पत्नियां उन पर लगाम लगाने की भरपूर कोशिश करती हैं.

नाटक में एक नन्हा किरदार भी था जिसका नाम गोपी था. गोपी पूरे नाटक में आकर्षण का केन्द्र रहा. बाल कलाकार गोपी की शरारत के कारण ही ये नाटक रोचक होता चला गया, नाटक में दूधवाला, डाकिया, बाबा जी और उनके चेले ने भी अपनी अपनी भूमिकायें निभाकर लोगों को हंसने पर मजबूर कर दिया.

नाटक में आया ट्विस्ट

नाटक का अंत शरीफ लोगों के घर में चोरी के साथ होता है. आखिरी में किरायेदार चंदा चोरी कर निकल जाती है.

नाटक अपने साथ एक संदेश भी छोड़ जाता है और वो संदेश ये है कि औरत हमारी बहुत बड़ी कमजोरी बन जाती है. नाटक देखने आए अतिथी के साथ-साथ वहां मौजूद लोगों ने भी ‘अरे शरीफ लोग’ की जमकर तारीफ की. ये नाटक करीब 70 मिनट का था.

यह कलाकार

‘अरे शरीफ लोग’ नाटक का मंचन करने वाले कलाकारों में मुख्य भूमिका में संजय कनोजिया(पंडित सीताराम), सतेन्द्र यादव (अनोखेलाल), शुभम सिंह बिष्ट(बिहारी लाल), अरुण यादव (डॉ. घटक), वहीं सोफ़िया खान (अनोखेलाल की पत्नी लक्ष्मी), सुनैना बिष्ट (पंडित सीताराम की पत्नी कलावती) और नाटक में बाल कलाकार दीपांश वर्मा गोपी की भूमिका निभाई. इसके साथ ही सहायक भूमिका में अन्नू कुमारी (डॉ. घटक की पत्नी सरला), भारती रावल, गोविन्द सिंह, अरिहंत जैन, तपस्या शर्मा, रोहन, सागर, वीर, मफुज आलम, कप्तान आदि थे. नाटक का निर्देशन सुनील चौहान, म्यूजिक सागर और देवांग प्रताप सिंह का रहा. वहीं बैक स्टेज कृष्णा सोनी, रंजेश, हैप्पी, कृष्णा दास,आदि थे.

स्त्रोत:-वेबवार्ता

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